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सोमवार, 12 फ़रवरी 2018

दोहे "शिव-शंकर का ध्यान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

शिव मन्दिर में ला रहे, भक्त आज उपहार।
दर्शन करने के लिए, लम्बी लगी कतार।१।
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बेर-बेल के पत्र ले, भक्त चले शिवधाम।
गूँज रहा है भुवन में, शिव-शंकर का नाम।२।
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काँवड़ लेकर आ गये, महिला-पुरुष अनेक।
पावन गंगा नीर से, करने को अभिषेक।३।
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जंगल में खिलने लगा, सेमल और पलाश।
हर-हर, बम-बम नाद से, गूँज रहा आकाश।४।
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गेँहू बौराया हुआ, सरसों करती नृत्य।
करते हैं सब जगत में, अपने-अपने कृत्य।५।
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शिव जी की त्रयोदशी, देती है सन्देश।
ग्राम-नगर का देश का, साफ करो परिवेश।६।
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देवों ने अमृत पिया, नहीं मिला वो मान।
महादेव शिव बन गये, विष का करके पान।७।
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नर-वानर-सुर मानते, जिनको सदा महेश।
विघ्नविनाशक के पिता, काटो सकल कलेश।८।
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सच्चे मन से जो करे, शिव-शंकर का ध्यान।
उसको ही मिलता सदा, भोले का वरदान।९।

3 टिप्‍पणियां:

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