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बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

दोहे "प्रेमदिवस पर प्रीत" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

प्रेम दिवस पर लीजिएव्रत जीवन में धार।
पल-पल प्रतिदिन कीजिएसच्चा-सच्चा प्यार।‍‍‍१।
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आवारा लगने लगी, प्रेमदिवस पर प्रीत।
सागर तट पर आ गयेलोग निभाने रीत।२।
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प्रेम दिवस में हो रहाखेल बहुत संगीन।
शब्द-ज़ाल में फँस गईनाजुक उम्र हसीन।३।
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नादानी में कभी मतकरना जग में प्यार।
बुरे-भले को सोचकर, ही करना इकरार।४।
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तोता-तोती पर चढ़ाप्रेम-दिवस का रंग।
दोनों ही सहला रहेइक-दूजे के अंग।५।
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चहक रहे हैं बाग मेंकलियाँ-सुमन अनेक।
धीरज और विवेक सेचुनना केवल एक।६।
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कंकड़-काँटों से भरीनहीं राह अनुकूल।
लेकर प्रीत-कुदाल कोसभी हटाना शूल।७।
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मन-विचार मिल जाय जबसमझो तभी बसन्त।
मास-दिवस मधुमास हैसमझो आदि न अन्त।८।
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सुख सरिता बहती रहेधार न हो अवरुद्ध।
निशि-दिन प्रेम प्रवाह सेइसको करो समृद्ध।९।
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दिल से मत तजना कभीप्रीत-रीत उद्गार।
सारस से लो सीख तुमक्या होता है प्यार।१०।
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चिकनी-चुपड़ी देखकर,मत टपकाओ लार।
सोच-समझकर ही सदादेना कुछ उपहार।११।
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पश्चिम की है सभ्यताप्रेमदिवस का वार।
लेकिन अपने देश मेंप्रतिदिन प्रेम अपार।१२।
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कभी नहीं जो मिट सकेबरसाओ वह रंग।
सिखलाओ संसार कोप्रेम-प्रीत के ढंग।१३।
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आडम्बर से युक्त हैप्रेमदिवस का खेल।
चमक-दमक में खो गयाअब सुमनों का मेल।१४।

2 टिप्‍पणियां:

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