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मंगलवार, 11 दिसंबर 2018

दोहे "महज नहीं संयोग" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

उलटफेर परिणाम में, महज नहीं संयोग।
तानाशाही को सहन, कब तक करते लोग।।

जनता की तो नाक में, पड़ती नहीं नकेल।
जनमत पर ही है टिका, लोकतन्त्र का खेल।।

जनसेवक जनतन्त्र में, ओटन लगे कपास।
पूरी होगी किस तरह, तब जनता की आस।।

जनता का जनतन्त्र में, जिसको मिलता साथ।
सत्ता की चाबी रहे, उस दल के ही हाथ।।

लोगों को लगने लगा, फिर से अच्छा हाथ।
छोड़ दिया है कमल का, जनता ने अब साथ।।

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (12-12-2018) को "महज नहीं संयोग" (चर्चा अंक-3183)) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत ही सुन्दर दोहे 👌👌

    जवाब देंहटाएं
  3. उलटफेर परिणाम में, महज नहीं संयोग।
    तानाशाही को सहन, कब तक करते लोग।।

    जनता की तो नाक में, पड़ती नहीं नकेल।
    जनमत पर ही है टिका, लोकतन्त्र का खेल।।

    जनसेवक जनतन्त्र में, ओटन लगे कपास।
    पूरी होगी किस तरह, तब जनता की आस।।

    जनता का जनतन्त्र में, जिसको मिलता साथ।
    सत्ता की चाबी रहे, उस दल के ही हाथ।।

    लोगों को लगने लगा, फिर से अच्छा हाथ।
    छोड़ दिया है कमल का, जनता ने अब साथ।।
    दोहावली मनोहर है साहित्यिक दृष्टि से लेकिन राजनीतिक मत वैभिन्न्य की गुंजाइश तो बनी ही रहती है :
    अपसंस्कृति का साथ हो या 'हाथ' कब किसको भाया है ,राजनीति में एक शब्द होता है इंकम्बेंसी फेक्टर यानी शासनारूढ़ घटक -तीन टर्म बतौर मुख्यमंत्री के भुगताने वाले चंद नाम ही आप जुटा पायेंगे तीन अभी चर्चा में हैं -शिवराज सिंह जी चौहान ,डॉ रमन सिंह ,वर्तमान प्रधानमन्त्री ,अलावा इनके शीला दीक्षित जी और अप्रतिम कीर्तिमान बनाने वाले ज्योति बासु दा जो १९७७ से लेकर २००० तक मुख्य मंत्री अपने पूरे आभामंडल के साथ बने रहे। १९९६ में जब किसी भी दल को बहुमत नहीं था उनका नाम प्रधानमन्त्री पद के लिए भी मुखर हुआ था लेकिन उनकी प्रजातंत्र और इस देश को पार्टी से कम समझने वाली 'वाम' ने उन्हें ऐसा न करने दिया। कुम्भाराम हार गया है चुनाव जीतने के बाद 'हाथ' का मुंह भी दूसरी जुबान बोलने लगा है अलबत्ता हमारी उम्मीद बरकरार है स्विस बैंक का , हेराल्ड का फंड पार्टी किसानों के लिए खोल सकती है। बड़े लोग हैं बड़ी साख वाले हैं लम्बे 'हाथ' वाले हैं ये लोग।
    veeruji05.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं

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