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शनिवार, 1 दिसंबर 2018

"अनोखा संस्मरण" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

"अनोखा संस्मरण"
    लगभग 25 साल पुरानी बात है! उन दिनों मेरा निवास ग्राउडफ्लोर पर था। दोनों बच्चे अलग कमरे में सोते थे। हमारे बेडरूम से 10 कदम की दूरी पर बाहर बराम्दे में शौचालय था। रात में मुझे लघुशंका के लिए जाना पड़ा। उसके बाद मैं अपने बिस्तर पर आकर सो गया। लेकिन दिसम्बर का महीना होने के कारण मुझे कुछ ठण्ड का आभास होने लगा। मैंने महसूस किया कि मेरे कपड़े कुछ गीले थे। मन में सोच विचार करता रहा कि मेरे कपड़े कैसे गीले हुए होंगे। तभी याद आया कि मैं कुछ देर पहले लघुशंका के लिए गया था। मन में घटना की पुनरावृत्ति होने लगी तो याद आया कि मैं शौचालय में गिरा पड़ा था और तन्द्रा में होने के कारण पुनः बिस्तर पर आकर लेट गया था।
    फिर तो पूरी घटना याद आ गयी कि मुझे वहाँ चक्कर आया था और न जाने कितनी देर मैं मूर्छा में रहा। मैंने मूर्छा में जो दिव्य दृश्य देखा उसे आज पाठकों के साथ साझा कर रहा हूँ
     मैं एक अनोखे और आनन्दमय संसार में पहुँच गया था। जहाँ पर मैंने विभिन्न देवी-देवताओं के दर्शन किये। यमराज से मेरा सीधा सम्वाद भी हुआ। जहाँ पर वो अपने गणनाकार से कह रहे थे कि इसे तो अभी बहुत जीना है। इसकी उम्र तो अभी पचास साल और है। तुम इसे यहाँ क्यों ले आये हो।
    इसके बाद मैं होश में आकर अपने बिस्तर पर आकर लेट गया था।
मैंने श्रीमती जी को जगाया और पूरी घटना उन्हें बताई तो उनकी नींद तो काफूर हो गयी थी। उन्होंने मेरे कपड़े बदले, बिस्तर बदला और बहुत सी बातें करते रहे। लेकिन इस घटना में खास बात यह रही कि शौचालय में गिरने के बाद भी मेरे किसी अंग में न तो कोई खरौच थी और न ही कोई पीड़ा थी।
    अब सवेरा हो गया था। हम लोग अपने दैनिक कार्यों में लग गये। उसके बाद आज तक ऐसी किसी घटना की पुनरानृत्ति मेरे साथ नहीं हुई।
मैंने तो इसे झेला है और तब से मैं परलोक को मानने लगा हूँ। मगर आप इसे क्या कहेंगे? 

4 टिप्‍पणियां:

  1. अनोखा संस्मरण एक सीख देती सच्ची घटना है स्वप्न आधारित। मृत्यु जैसा अनुभव तो हम इसे नहीं ही कहेंगे अलबत्ता एक स्वप्न के आलावा एक बात गिरह बाँधने योग्य है। जब भी हमारी लघुशंका के कारण नींद खुलती है वह खाब की प्रावस्था होती है जो बा -मुश्किल अवधि तो डेढ़ दो मिनिट की ही रहती है लेकिन हमारे अनुभव में समय एक बड़े काल खंड में फैला दिखता है।

    नॉट करें रात को नींद से पेशाब की हाज़त होने पर एक दम से हड़बड़ाकर न उठें। बाईं करवट लें दाहिने हाथ का सहारा लें ,अधलेटे रहते हुए पैर बिस्तर से नीचे लटकाए अब बैठिये पाँव टिकाकर जमीन पर एक मिनिट और भी बैठे रहें बिस्तर पर भले पेशाब का प्रेशर बढ़ता लगे। अब आप धीरे से खड़े होवे सहारा लेकर ही चलें।दीवार का। आपका ब्लड प्रेशर एक दम से गिरेगा नहीं।यही गिरावट मूर्च्छा अर्द्ध मूर्च्छा और हार्ट अटेक यहां तक के आघात (ब्रेन अटेक )की भी हो सकती है।आप रक्त चाप में यकायक आई गिरावट की वजह से भी गिरे हो सकतें हैं गुसल खाने में।

    बढ़िया आगाह करता संस्मरण। सीख देता है शास्त्री जी का।

    veerujan.blogspot.com
    veersa.blogspot.com
    veeruji05.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. आश्चर्यचकित करने वाला संस्मरण

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  3. अनोखा संस्मरण एक सीख देती सच्ची घटना है स्वप्न आधारित। मृत्यु जैसा अनुभव तो हम इसे नहीं ही कहेंगे अलबत्ता एक स्वप्न के आलावा एक बात गिरह बाँधने योग्य है। जब भी हमारी लघुशंका के कारण नींद खुलती है वह खाब की प्रावस्था होती है जो बा -मुश्किल अवधि तो डेढ़ दो मिनिट की ही रहती है लेकिन हमारे अनुभव में समय एक बड़े काल खंड में फैला दिखता है।

    नॉट करें रात को नींद से पेशाब की हाज़त होने पर एक दम से हड़बड़ाकर न उठें। बाईं करवट लें दाहिने हाथ का सहारा लें ,अधलेटे रहते हुए पैर बिस्तर से नीचे लटकाए अब बैठिये पाँव टिकाकर जमीन पर एक मिनिट और भी बैठे रहें बिस्तर पर भले पेशाब का प्रेशर बढ़ता लगे। अब आप धीरे से खड़े होवे सहारा लेकर ही चलें।दीवार का। आपका ब्लड प्रेशर एक दम से गिरेगा नहीं।यही गिरावट मूर्च्छा अर्द्ध मूर्च्छा और हार्ट अटेक यहां तक के आघात (ब्रेन अटेक )की भी हो सकती है।आप रक्त चाप में यकायक आई गिरावट की वजह से भी गिरे हो सकतें हैं गुसल खाने में।

    बढ़िया आगाह करता संस्मरण। सीख देता है शास्त्री जी का।

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  4. वीरू साहब की बात चिकित्सकीय अनुभव से सही प्रतीत होती है। अनुभव फिर भी अनुभव है।

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