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शनिवार, 8 दिसंबर 2018

ग़ज़ल "कल हो जाता आज पुराना" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जीवन एक मुसाफिरखाना
जो आया हैउसको जाना

झूठी कायाझूठी छाया
माया में मत मन भरमाना

सुख के सपने रिश्ते-नाते
बहुत कठिन है इन्हें निभाना

ताकत है तोसब है अपने
कमजोरी में झिड़की-ताना

आँखों के तारे दुर्दिन में
जान गये हैं आँख दिखाना

इस दुनिया की यही कहानी
कल हो जाता आज पुराना

सुमन सीख देते हैं सबको
आज खिले कल है मुरझाना

रूप” न टिकता कभी किसी का
क्षमा न करता कभी ज़माना 

4 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बहुत खूब लिखा है सर।

    जवाब देंहटाएं
  2. जीवन एक मुसाफिरखाना
    जो आया है, उसको जाना

    झूठी काया, झूठी छाया
    माया में मत मन भरमाना

    सुख के सपने रिश्ते-नाते
    बहुत कठिन है इन्हें निभाना

    ताकत है तो, सब है अपने
    कमजोरी में झिड़की-ताना

    आँखों के तारे दुर्दिन में
    जान गये हैं आँख दिखाना

    इस दुनिया की यही कहानी
    कल हो जाता आज पुराना

    सुमन सीख देते हैं सबको
    आज खिले कल है मुरझाना

    “रूप” न टिकता कभी किसी का
    क्षमा न करता कभी ज़माना
    तमाम अशआर अपना वजन और अर्थ मुखरित कर रहें हैं बे -पर्दा हो :
    तरुवर पत्ते को समझाए
    अभी है आना, अभी है जाना ,
    अभी नया है अभी पुराना।
    veerujan.blogspot.com
    veerusa.blogspot.com
    physicalsciences05.blogspot.com
    veeruji05.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  3. सृष्टि का नियम है परिवर्तन -कुछ भी इससे अछूता नहीं रहता.

    जवाब देंहटाएं

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