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रविवार, 9 दिसंबर 2018

संस्मरण "वो पतला सा शॉल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

वो पतला सा शॉल
      आज से ठीक अट्ठारह साल पुरानी बात है। उत्तराखण्ड को जन्मे हुए उस समय एक मास ही हुआ था और उसके पहले मनोनीत मुख्यमन्त्री थे नित्यानन्द स्वामी। मा. नित्यानन्द स्वामी से मेरा बहुत पुराना सम्बन्ध था। उस समय मैं खटीमा में पूर्व माध्यमिक विद्यालय चलाता था और आदरणीय स्वामी जी उत्तरप्रदेश में एम.एल.सी के लिए स्नातक कोटे से ही चुनाव लड़ते थे। इसलिए वह जब खटीमा आते थे तो मेरे निवास पर अवश्य आते थे। अतः मैं उनसे मिलने के लिए देहरादून के लिए चल पड़ा। साथ में बनबसा निवासी मेरे मित्र डॉ. अशोक शर्मा भी थे।
       इस यात्रा में हम दोनों लोग पहले दिल्ली गये उसके बाद रुड़की होते हुए देहरादून प्रातःकाल पहुँचे। उस समय उत्तराखण्ड नया था राजधानी नई थी और मुख्यमन्त्री निवास कैण्ट में बने पुराने एनेक्सी भवन को बनाया गया था। वर्तमान में तो उसी स्थान पर भव्य भवन बन गया है जो मुख्यमन्त्री का आधिकारिक निवास बन गया है।
       प्रातः काल दस बजे हम मा. मुख्यमन्त्री श्री नित्यानन्द स्वामी से मिलने के लिए कैण्ट में बने पुराने एनेक्सी भवन में पहुँचे। उस समय मुख्यमन्त्री की सुरक्षा तो पर्याप्त थी मगर इस भवन की चाहरदीवारी नहीं थी। कंटीले तारों से अस्थायी सुरक्षा की हुई थी। मा. मुख्यमन्त्री उस समय बाहर खुली धूप में बैठे हुए थे। उनके साथ उनके सलाहकार नारायण सिंह राणा जी और कुछ आगन्तुक लोग बैठे थे। जब हम प्रवेश द्वार पर गये तो सुरक्षा कारणों से तलाशी तो होनी ही थी और हमें इसमें कोई आपत्ति भी नहीं थी। मुझे मा.मुख्यमन्त्री जी ने जब देखा तो उनके साथ बैठे उनके सलाहकार नारायण सिंह राणा जी जो को गेट पर भेजा और राणा जी ने सुरक्षा कर्मियों को कहा कि इनको आने दो और हम मुध्यमन्त्री जी के पास पहुँच गये।
        पुराने दिनों की काफी बातें हुई और हम लोग बधाई देकर खटीमा के लिए लौटने लगे। संयोगवश हमें बरेली के लिए देहरादून हावड़ा ऐक्सप्रेस में रिजर्वेशन भी मिल गया। नौ दिसम्बर का दिन था और सर्दी भी काफी थी मगर मेरे पास एक पतला सा शॉल था। रात में गर्म कपड़े पहने हुए मैं बर्थ पर लेट गया और ऊपर से वह पतला सा शॉल ओढ़ लिया। सर्दी अत्यधिक बोने के बावजूद भी उस पतले से शॉल में इतनी गर्माहट न जाने कहाँ से भर गयी जितनी कि आज तक मुझे भारी-भरकम रजाई में भी नहीं महसूस हुई।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (10-12-2018) को "उभरेगी नई तस्वीर " (चर्चा अंक-3181) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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