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गुरुवार, 12 सितंबर 2019

दोहे "चतुर्दशी का पर्व" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


आदिदेव के नाम से, करना सब शुभ-कार्य।
गणपति की पूजा करो, कहते धर्माचार्य।।
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भर देता नवऊर्जा, चतुर्दशी का पर्व।
गणपति के त्यौहार पर, भक्तों को है गर्व।।
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हुआ चतुर्थी से शुरू, गणपति जी का पर्व।
हर्षित होते दस दिवस, सुर-नर, मुनि गन्धर्व।।
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वन्दन-पूजन से किया, सबने विदा गणेश।
विघ्नविनाशक आप ही, सबके हो प्राणेश।।
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बाधाओं का शमन हो, मिट जायेंगे रोग।
मोदक से विध्नेश को, आप लगायें भोग।।
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रमा और माँ शारदे, रहें आपके साथ।
रखना मेरे शीश पर, गणनायक जी हाथ।।
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मूषक ढोता आपका, भारी-भरकम भार।
गणपति मेरे सदन में, आओ बारम्बार।।
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