"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

समर्थक

रविवार, 26 जुलाई 2020

समीक्षा “सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ” (हीरो वाधवानी)

समीक्षा
सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ” 
 
      अपने सत्तर साल के जीवन में मैंने यह देखा है कि गद्य-पद्य में रचनाधर्मी बहुत लम्बे समय से सृजन कर रहे हैं। लेकिन ऐसे बहुत कम लोग हैं जो सूक्तियों की रचना में आज भी संलग्न हैं। इनमें हीरो वाधवानी का नाम मैं प्रमुखता से लेना अपना धर्म समझता हूँ।
      मेरा यह मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर एक रचनाकार छिपा होता है। जो अपनी रुचि के अनुसार गद्य-पद्य की रचना करता है। लेकिन सूक्तियों की रचना करना एक दुष्कर कार्य होता है। सूक्तियों की रचना करनेवाले ऋषियों-मुनियों की श्रेणी में आते हैं। ऐसे लोग अक्सर सन्त-महात्मा ही होते हैं। लेकिन हीरो वाधवानी जी अपने गृहस्थ जीवन का निर्वहन करते हुए सूक्तियों का सतत सृजन कर रहे हैं। जो अपने आप में एक विलक्षण कार्य है।
     लगभग तीन माह पूर्व मुझे इनकी सूक्तियों पर आधारित कृति सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ का हाल ही में प्रकाशित संकलन मुझे मिला। कई बार मैंने सूक्तियों की इस कृति पर कुछ लिखने का मन बनाया। परन्तु देश में तालाबन्दी (लॉकडाउन) हो गया। मन में खिन्नता हुई और लगभग सारे दैनिक कार्य प्रभावित हो गये। आज जब अपना पिटारा खोलकर देखा तो सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ  हाथ में आ गई और कुछ लिखने के लिए मेरी अंगुलियाँ कम्प्यूटर के की बोर्ड पर चलनें लगी।
     पक्की जिल्दसाजी और आकर्षक आवरण के साथ 170 पृष्ठों के सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ संकलन को अयन प्रकाशन दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया गया है। जिसका मूल्य 300/- रुपये मात्र है। 
        हीरो वाधवानी जी ने इस पुस्तक के साथ मुझे एक पत्र भी प्रेषित किया है जिसमें उन्होंने लिखा है- "मैं अपनी लिखी पुस्तकें निःशुल्क भेंट करता हूँ लेकिन दूसरों की पुस्तकें खरीदकर पढ़ता हूँ।"
      हीरो वाधवानी जी की लेखनी जीवनोपयोगी सूक्तियों लिखने में आज भी गतिमान है है। जिसका स्वतः प्रमाण उनकी कृति सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ है। 
       “सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ में अपने नाम  नाम के अनुरूप ही सकारात्मक और अर्थपूर्ण जीवन सूत्रों का शब्दकोश है। उदाहरण के लिए यहाँ मैं हीरो वाधवानी जी की ग्यारह सूक्तियों को उद्धृत कर रहा हूँ-
-1-
"क्रोध आये तो जगह बदल दो।"
-2-
"दुःख का कारण?
इंसान की बुरी आदतें, बुरे विचार और
अभद्र कार्य हैं।"
-3-
"आँखें आधा शरीर है।"
-4-
"एक मुस्कराहट में बीस शृंगार सम्मिलित होते हैं।"
-5-
"तीर वैसे ही बुरे हैं,
उनमें और अधिक जहर न डालें।"
-6-
"बड़े बुजुर्ग,
बरगद के पेड़ हैं।"
-7-
अन्धविश्वास मिट्टी का पहाड़ है
लेकिन
हम उसे पत्थर का पहाड़ समझते हैं।"
-8-
"दुष्ट भेड़िए से भी बुरा है।"
-9-
"माँ शहद और पिता मिश्री है।"
-10-
गलतियों को छिपाने वाला परदा
हमेशा छोटा हो जाता है।"
-11-
"प्यार
मन्दिर, मसजिद, गिरजा गुरुद्वारे
और मठों की नींव है।"
      सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ के विषय में जाने-माने कवि, साहित्यकार और ब्लॉगर दिलबाग सिंह विर्क लिखते हैं- 
      "अगर विदुर नीति और चाणक्य नीति को पढ़ा जा सकता है हीरो वाधवानी को क्यों नहीं, मनीला में रहते हुए हिन्दी में लिखना अपने आप में सराहनीय है और अगर इन तमाम सूक्तियों में से कुछ को ही जीवन में अपनाया जाये तो जीवन सुधर सकता है। इस दृष्टिकोण से लेखक का प्रयास सराहनीय है।"
     इसके अतिरिक्त मीनाक्षी सिंह, संजय तन्हा, सुरेश कान्त, उमा प्रसाद लोधी, हरि शर्मा, प्रताप सिंह नेगी कवि, डॉ. शिव कुशवाह शाश्वत, आरती शर्मा, राजमनी राज, नवीन गौतम, भावना सिन्हा, कल्पना रामानी, कंचन पाठक, बालकवि वैरागी, गुलकुतार लालवानी, प्रियंका प्रियदर्शिनी, विजय कुमार राय, ए.एस.खान अली, डॉ. पुष्पलता, मुकेश शर्मा, एस.आर.उपाध्याय, कवि दादू प्रजापति, प्रो. सक्ष्मण हर्दवानी, शशिकान्त पाठक, वन्दना वाणी, विवेक कवीश्वर आदि साहित्यकारों ने भी  सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ के विषय में अपने-अपने शब्दों में भूरि-भूरि प्रसंशा की है।
      मुझे पूरा विश्वास है कि हीरो वाधवानी जी की अनमोल मोतियों से सुसज्जित कृति सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ को पढ़कर सभी वर्गों के पाठक लाभान्वित होंगे तथा समीक्षकों की दृष्टि से भी यह सूक्ति संकलन उपादेय सिद्ध होगा।
     हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
दिनांक- 24 जुलाई, 2020
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक’)
कवि एवं साहित्यकार
टनकपुर-रोड, खटीमा
जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड) 262 308
E-Mail . roopchandrashastri@gmail.com
Website. http://uchcharan.blogspot.com/
मोबाइल-7906360576, 7906295141 

4 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी पुस्तक सूक्रियों पर ... और बहुत लाजवाब आपकी समीक्षा ...

    जवाब देंहटाएं
  2. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा सोमवार (27-07-2020) को 'कैनवास' में इस बार मीना शर्मा जी की रचनाएँ (चर्चा अंक 3775) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्त्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाए।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    --
    -रवीन्द्र सिंह यादव

    जवाब देंहटाएं
  3. लाजवाब समीक्षा आदरणीय सर | सूक्ति लेखन भी हो रहा है ये बात अचम्भित भी कर गयी और आह्लादित भी | हीरो बाधवानी जी को हार्दिक बधाई उर शुभकामनाएं|

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails