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सरहद पर मुस्तैद हैं, अपने
वीर जवान।।
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सेनाओं को दे दिये, अब उन्नत
हथियार।
सीमाओं पर फौज को, हैं सारे
अधिकार।।
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भारत का बल देखकर, परेशान
है चीन।
अब अपने भूभाग को, लेगा भारत
छीन।।
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ड्रैगन की हर चाल को, समझ
रही सरकार।
चीन-पाक से युद्ध को, भारत
है तैयार।।
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हमें छेड़ने की कभी, कर मत
देना भूल।
फूलों के हैं मूल में, बैठे
विष के शूल।।
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अपने भाषण में दिया, मोदी ने
सन्देश।
नहीं दुष्ट को छोड़ता, अपना
भारत देश।।
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बिना वजह करते नहीं, हम कोई
तकरार।
लेकिन धमकी है नहीं, भारत
को स्वीकार।।
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जी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार(०८-०७-२०२०) को 'शब्द-सृजन-२८ 'सरहद /सीमा' (चर्चा अंक-३७५३) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है
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अनीता सैनी
वाह ! बहुत खूब। क्या प्रतिक्रिया व्यक्त किया है आपने अपनी रचना में। बेहद खूबसूरत।
जवाब देंहटाएंसुन्दर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंभारत का बल देखकर, परेशान है चीन।
जवाब देंहटाएंअब अपने भूभाग को, लेगा भारत छीन।।
समसामयिक लाजवाब दोहे।
हौसले से भरपूर ओज पैदा करते वीर रस के अभिनव दोहे।
जवाब देंहटाएं