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शुक्रवार, 27 नवंबर 2020

गीत "आसमान का छोर, तुम्हारे हाथों में" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आसमान का छोर, तुम्हारे हाथों में।
कनकइया की डोर तुम्हारे हाथों में।।
--
लहराती-बलखाती, पेंग बढ़ाती है,
नीलगगन में ऊँची उड़ती जाती है,
होती भावविभोर तुम्हारे हाथों में।
कनकइया की डोर तुम्हारे हाथों में।।
--
वसुन्धरा की प्यास बुझाती है गंगा,
पावन गंगाजल करता तन-मन चंगा,
सरगम का मृदु शोर तुम्हारे हाथों में।।
कनकइया की डोर तुम्हारे हाथों में।।
--
उपवन में कलिकाएँ जब मुस्काती हैं,
भ्रमर और तितली को महक सुहाती है,
जीवन की है भोर तुम्हारे हाथों में।
कनकइया की डोर तुम्हारे हाथों में।।
--
प्रणय-प्रेम के बिना अधूरी पावस है,
बिन मयंक के छायी घोर अमावस है,
चन्दा और चकोर तुम्हारे हाथों में।
कनकइया की डोर तुम्हारे हाथों में।।
--

8 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (२८-११-२०२०) को 'दर्पण दर्शन'(चर्चा अंक- ३८९९ ) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  2. आसमान का छोर, तुम्हारे हाथों में।
    कनकइया की डोर तुम्हारे हाथों में।।..।

    'कनकइया' शब्द का लाजवाब प्रयोग। नमन है आपको 🙏

    जवाब देंहटाएं
  3. प्रणय-प्रेम के बिना अधूरी पावस है,
    बिन “मयंक” के छायी घोर अमावस है,
    चन्दा और चकोर तुम्हारे हाथों में।
    कनकइया की डोर तुम्हारे हाथों में।।
    वाह!!!!
    बहुत ही सुन्दर गीत।

    जवाब देंहटाएं
  4. लहराती-बलखाती, पेंग बढ़ाती है,
    नीलगगन में ऊँची उड़ती जाती है,
    होती भावविभोर तुम्हारे हाथों में।
    कनकइया की डोर तुम्हारे हाथों में।।

    सुंदर रचना

    जवाब देंहटाएं
  5. चन्दा और चकोर तुम्हारे हाथों में।
    कनकइया की डोर तुम्हारे हाथों में।।
    सुन्दर रचना - - नमन सह।

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर भाव मुग्ध करता अप्रतिम सृजन।

    जवाब देंहटाएं

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