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वाह। सटीक एवं सार्थक।
जवाब देंहटाएंसोचकर चौपाल में मुँह खोलना
जवाब देंहटाएंतल्खियाँ देतीं बड़ा आघात हैं
सुन्दर एवं सार्थक ग़ज़ल
बहुत सुंदर रचना।
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (१०-११-२०२०) को "आज नया एक गीत लिखूं"(चर्चा अंक- 3881) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
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कामिनी सिन्हा
बहुत सुन्दर गजल है |
जवाब देंहटाएंbhut bdiya post likhi hai aapne Ankitbadigar ki dhanyvaad
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