पहली
बारिश
हुई
धरा
पर, मौसम
कितना
हुआ
सुहाना। देख
घटाएँ
आसमान
पर, दादुर गाते हैं गाना।। -- फटी पपेली-हुआ उजाला, हुई
सभी
को
हैरानी, पहले आँधी चली जोर से, फिर
बरसा
जमकर
पानी, बाँट
रहा
सुख
जन-मानस
को, पहली
बारिश
का
आना। देख
घटाएँ
आसमान
पर, दादुर गाते हैं गाना।। -- सूख रहा जल
जलाशयों
का, झुलस रहे थे उपवन-वन, गरम
हवाएँ
चलती
दिन
भर, नहीं
काम
में
लगता
मन,
भूल गयीं थीं सब चिड़ियायें, शाखाओं पर इठलाना। देख
घटाएँ
आसमान
पर, दादुर गाते हैं गाना।। -- कल
तक
जीवन
कठिन
हुआ
था,
अनल हवा में
था पसरा, जलती छत पक्के मकान की, जलती प्यारी वसुन्धरा, विकल
चरिन्दे
और
परिन्दे, खोज
रहे
हैं
ठौर
ठिकाना। देख
घटाएँ
आसमान
पर, दादुर गाते हैं गाना।। -- खिले किसानों के चेहरे, अब
आस बँधी है नव्य फसल की, पौध धान की चले रोपने, हल ने खेतों में हलचल की, बया चल पड़ी
तिनके
लाने, बुनने
को
ताना-बाना। देख
घटाएँ
आसमान
पर, दादुर गाते हैं गाना।। -- बच्चे खेल रहे बारिश में, धमाचौकड़ी खूब मचाते, काग़ज़ की इक नाव बनाकर, गड्ढों में उसको
तैराते, धरती
को
मिल
जायेगा
अब, हरियाली
का
नजराना। देख
घटाएँ
आसमान
पर, दादुर गाते हैं गाना।। -- |
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पहली बारिश की बात ही कुछ और है
जवाब देंहटाएंवाह! अद्भुत चित्रण!!!
जवाब देंहटाएंबारिश पर मनभावन रचना
जवाब देंहटाएंबारिश का अहसास कराती मन को भाने वाली कविता। पहली बारिश को महसूसना एक अलग ही अनुभव होता है।
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