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रविवार, 10 जनवरी 2016

दोहे "सन्त चले हरद्वार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


उत्तरायणी पर्व की, मची हुई है धूम।
लोग उत्तराखण्ड में, रहे खुशी से झूम।।
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अर्द्धकुम्भ के लिए अब, घाट हुए तैयार।
गंगाजल अभिषेक को, सन्त चले हरद्वार।।
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आने वाली लोहड़ी, बाँटेगी सौगात।
कम होगा अब देश में, जाड़े का उत्पात।।
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पतझड़ में झड़ जायगें, सारे पीले पात।।
पेड़ों-पौधों का नवल, हो जायेगा गात।।
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आयेगा मधुमास तो, सुधरेगा परिवेश।
गूँजेंगे परिवेश में, प्यार भरे सन्देश।।
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बढ़ जायेगा देश में, अब फिर से दिनमान।
कोयलिया वन-बाग में, फिर छेड़ेगी तान।।
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सरसों की मुस्कान में, खुशियों के संकेत।
पीताम्बर को धार कर, सरसेंगे फिर खेत।।

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