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शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

"प्रेम-प्रीत का हो संसार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक')


बुलबुल गाये मधुर तराने, प्रेम-प्रीत का हो संसार।
नया साल मंगलमय होवे, महके-चहके घर परिवार।।

ऋतुओं में सुख की सुगन्ध हो,
काव्यशास्त्र से सजे छन्द हों,
ममता में समानता होवे, मिले सुता को सुत सा प्यार।
नया साल मंगल मय होवे, महके-चहके घर-परिवार।।

फूल खिलें हों गुलशन-गुलशन,
झूम-झूमकर बरसे सावन,
नदियों में कल-कल निनाद हो, मोर-मोरनी गायें मल्हार।
नया साल मंगल मय होवे, महके-चहके घर-परिवार।।

भेद-भाव का भूत न होवे,
कोई पूत कपूत न होवे,
हिन्दी की बिन्दी की गूँजे, दुनियाभर में जय-जयकार।
नया साल मंगल मय होवे, महके-चहके घर-परिवार।।

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