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बुधवार, 13 जनवरी 2016

"दोहे-आई फिर से लोहिड़ी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


आई फिर से लोहिड़ी, लेकर नवल उमंग।
अब फिर से बजने लगे, ढोलक और मृदंग।१।
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पर्व लोहिड़ी का हमेंदेता है सन्देश।
मानवता अपनाइएसुधरेगा परिवेश।२।
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प्रेम और सद्भाव सेबनते बिगड़े काज।
मूँगफली औरेवड़ीबाँटो सबको आज।३।
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गुड़ में भरी मिठास हैतिल में होता स्नेह।
खाकर मीठा बोलिएबना रहेगा नेह।४।
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बेटी रत्न अमोल हैकुदरत का उपहार।
बेटा-बेटी में करोसमता का व्यवहार।५।

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