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रविवार, 13 मार्च 2016

"भारत और नेपाल सीमा की सैर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सीमा की सैर
सीमा के हैं मस्त नजारे भारत और नेपाल के।
लेते हैं आनन्द पथिक घोड़े-ताँगे की चाल के।।
इस पार हमारा भारत है उस पार बसा नेपाल देश।
जलधारा नदी शारदा की, मध्यस्थ बन रही है विशेष।।
34 दर वाला सँकरा सा, आवाजाही का साधन है। 
बैराज बहुत यह लम्बा सा, जीवित है मगर पुरातन है।।
भारत की सीमा पर प्रतिदिन, लहराता है झण्डा अपना।
आजादी का पल-पल प्रतिपल, साकार सजा अपना सपना।।
देकर नहर शारदा ने, भारत का रूप निखारा है।
नेपाल देश के सिंचन को, हमने दी छोटी धारा है।।
यदि सैर करो तुम कभी यहाँ, तो घोड़े-ताँगे से करना।
मोहक-कुदरती नजारों से, अपने मन का कोना भरना।।

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