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बुधवार, 23 मार्च 2016

दोहे "बाँटो सबको प्यार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


रंगों का अब आ गया, मनभावन त्यौहार।
रूठे सुजन मनाइए, करके यत्न हजार।।

होली के त्यौहार में, बाँटो सबको प्यार।
रंगों की बौछार से, निर्मल करो विकार।।

बच्चों-बूढ़ों के लिए, रहना सदा उदार।
रंग-अबीर-गुलाल है, होली का उपहार।।

हँसी-ठिठोली को करो, मर्यादा के संग।
जो लगवाये प्यार से, उसे लगाओ रंग।।

देख खेत में अन्न को, होता हर्ष अपार।
इसीलिए मधुमास में, आता ये त्यौहार।।

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