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बुधवार, 15 जून 2016

"एक दिन पिकनिक के नाम" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


अगर कभी आपका कार्यक्रम उत्तराखण्ड में 
कुमाऊँ में घूमने का बन जाता है तो 
दिल्ली से 350 किमी मुरादाबाद से 185 किमी की दूरी पर 
नेपाल सीमा पर बसा टनकपुर शहर है। 
इसे पहाड़ों का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है।


(चित्र माता श्री पूर्णागिरि दरबार, चम्गावत-उत्तराखण्ड)
सिद्ध-पीठ के रूप में मानी जाने वाली माता पूर्णागिरि के रास्ते में टनकपुर से 14 किमी दूर शारदा नदी के किनारे घने जंगलों के बीच एक स्थान बूम के नाम से जाना जाता है।
इसके प्राकृतिक नजारे तो आपको अपनी ओर आकर्षित करेंगे। 

यहाँ बंगाली शैली का माता माधवी का मन्दिर भी आपका मन जरूर मोह लेगा।
                           माता माधवी के मन्दिर के साथ ही यहाँ उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग ने 
एक छोटा सा गेस्ट हाउस भी बना दिया है।
        आज होली का दिन है। कल रंगों की दुल्हैण्डी होगी। घर में कुछ अतिथि भी आये हुए हैं । अतः आज बूम में पिकनिक मनाने का कार्यक्रम बन ही गया। सबसे पहले हम लोग दो कारों में बैठ कर बूम पहुँचे। शारदा नदी के कल-कल निनाद ने मन ऐसा मोहा कि नदी में स्नान का मूड बन ही गया। एक घण्टे में सब लोग स्नान से निवृत्त हो गये। इसके बाद हम लोग उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग द्वारा बनाये गये गेस्ट हाउस की टैरेस पर आ गये।
       जिस पर विशाल टीन शेड बना हुआ है। पूर्णागिरि मेले के समय में इसमें 100 के लगभग फोल्डिंग चारपाई बिछा दी जाती हैं। कुछ श्रद्धालू यहाँ भी रात्रि विश्राम कर ही लेते हैं। हम लोगों ने यहाँ कुछ देर विश्राम किया और रसोइए को खाना बनाने को कह दिया गया। इसके बाद हम लोग माता माधवी देवी के आश्रम में बने विशाल मन्दिर को देखने गयेआप भी देखें। इन सुन्दर दृश्यों को... -
मन्दिर में दर्शन के उपरान्त हम लोग पुनः गेस्ट हाउस में आये और 

टैरेस पर ही दरी बिछा कर भोजन किया। 

पिकनिक पूरी हो गयी।

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