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रविवार, 11 मार्च 2018

गीतिका छन्द "नव वर्ष चलकर आ रहा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मित्रों!
आज गीतिका छन्द में 
कुछ लिखने का प्रयास किया है। गीतिका छन्द एक सममात्रिक छन्द है । इसमें चार चरण होते हैं । प्रत्येक चरण में 14 और12 की यति से 26 मात्राएँ होती हैं । प्रत्येक चरण के अंत में लघु और गुरु होता है ।
खिल उठे हैं बाग-वन मधुमास सबको भा रहा।
होलिका के बाद में नव वर्ष चलकर आ रहा।।

वृक्ष सब छोटे-बड़े नव पल्लवों को पा गये।
आम, जामुन-नीम भी मदमस्त हो बौरा गये।।

जोड़कर तिनके बया है नीड़ अपना बुन रहा।
देवपूजन के लिए नव सुमन माली चुन रहा।।

डाल पर बैठे हुए कोकिल तराने गा रहे।
तितलियाँ-मधुमक्खियाँ मधु चाव से हैं खा रहे।।

आ गये नवरात्र अब व्रत-जागरण को कीजिए।
पात्र हैं जो दान के उन पर कृपा भी दीजिए।।

गुरुजनों, माता-पिता का मान करना चाहिए।
आय के अनुसार कुछ तो दान करना चाहिए।।

देश की सन्तान को कुछ काम आना चाहिए।
मातृभू का और माँ का ऋण चुकाना चाहिए।

आओ लहरायें पताका और हम सब प्रण करें।
देश के हित में जियें हम देश के हित में मरें।।
  

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (12-03-2018) को ) "नव वर्ष चलकर आ रहा" (चर्चा अंक-2907) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत अच्छा लिखा आपने
    शब्द चयन और भाव दोनों लाजवाब है

    उत्तर देंहटाएं
  3. सच्चे अर्थों में हमारा नववर्ष ही उपयुक्त परिवेश लेकर आता है
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं

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