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रविवार, 18 मार्च 2018

दोहे "केवल हिन्दुूवर्ष क्यों" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

ओ भारत के वासियों, मन को करो उदार।
केवल हिन्दू वर्ष क्यों, इसको रहे पुकार।।
--
पंथ भिन्न तो क्या हुआ, सबका है ये देश।
सम्वत्सर से चमन में, उन्नत हो परिवेश।।
--
नवसम्वत्सर आ गया, गया पुराना साल।
नूतन आशाएँ जगीं, सुधरेंगे अब हाल।।
--
नौ दिन के ही लिए क्यों, करते पूजा-जाप।
प्रतिदिन पूजा-पाठ से, कटते संकट-ताप।।
--
माँ जगदम्बा का करो, सच्चे मन से ध्यान।
माँ देवी का रूप है, माता बहुत महान।।
--
माता से अस्तित्व है, सन्तानों का आज।
माँ की पूजा से बनें, सबके बिगड़े काज।।
--
धरती में-आकाश में, देवताओं का वास।
कभी न करना चाहिए, देवों का उपहास।।
--
कुदरत की अठखेलियाँ, करती बहुत उदास।
आशा है नववर्ष फिर, लायेगा उल्लास।।

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (19-03-2018) को ) "भारतीय नव वर्ष नव सम्वत्सर 2075" (चर्चा अंक-2914) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

    उत्तर देंहटाएं
  2. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' १९ मार्च २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

    निमंत्रण

    विशेष : 'सोमवार' १९ मार्च २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने सोमवारीय साप्ताहिक अंक में आदरणीया 'पुष्पा' मेहरा और आदरणीया 'विभारानी' श्रीवास्तव जी से आपका परिचय करवाने जा रहा है।

    अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  3. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 20/03/2018 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बिलकुल ..
    ये नव वर्ष पूरी सृष्टि का है ...

    उत्तर देंहटाएं

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