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शुक्रवार, 2 मार्च 2018

दोहे "होली गयी सिधार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

होली अब हो ली हुई, विदा हुआ त्यौहार।
एक बरस के बाद फिर, बरसेगी रसधार।१।
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बैर-भाव रखना नहीं, करना सबसे प्यार।
दे करके सन्देश ये, होली गयी सिधार।२।
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कृपा करो परमात्मा, सुखी रहें नर-नार।
हँसी-खुशी के साथ में, मनें सभी त्यौहार।३।
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होली में जिस तरह से, उमड़ा प्रेम अपार।
हर दिन ऐसा ही रहे, सबके दिल में प्यार।४।
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चार दिनों की ज़िन्दग़ी, रहना नहीं उदास
रहना मत अभिमान में, मत करना उपहास।५।
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होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!

2 टिप्‍पणियां:

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