"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

बुधवार, 25 अप्रैल 2018

दोहे "किसे सुनायें गीत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')



चंचल मन में ईश का, दुर्लभ है संयोग।
भावशून्य हो चित्त जब, तब ही सम्भव योग।।

जन्म दिवस पर बाँटते, इष्ट-मित्र उपहार।
लेकिन घटते जा रहे, साल-महीने-वार।।

जिनके सूखे गात हैं, पीत हो गये पात।
उनको भी मधुमास में, मिल जाती सौगात।।

जीत-हार का खेल है, जीवन का संग्राम।
घटनाओं पर तो कभी, लगता नहीं विराम।।

मतलब में करते यहाँ, सभी लोग मनुहार।
सम्बन्धों में घट रहा, धीरे-धीरे प्यार।।

नहीं रहा वो समय अब, नहीं रहे वो मीत।
आपाधापी में यहाँ, किसे सुनायें गीत।।

बदल गये मौसम यहाँ, बदल गयी है रीत।
सरगम तो बदली नहीं, बदल गया संगीत।।

5 टिप्‍पणियां:

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails