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शनिवार, 7 अप्रैल 2018

दोहे "करो सतत् अभ्यास" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


दोहे के बारे में जानिए
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मन में जब तक आपकेहोगा शब्द-अभाव।
दोहे में तब तक नहींहोंगे पुलकित भाव।१।
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गति-यतिसुर-लय-ताल सबहैं दोहे के अंग।
कविता रचने के लिएइनको रखना संग।२।
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दोहा वाचन में अगरआता हो व्यवधान।
गिनो अक्षरों को जराएक बार श्रीमान।३।
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लघु में लगता है समयएक-गुना श्रीमान।
अगर दो-गुना लग रहागुरू उसे लो जान।४।
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दोहे में तो गणों काहोता बहुत महत्व।
गण भी तो इस छन्द केहैं आवश्यक तत्व।५।
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तेरह ग्यारह से बनादोहा छन्द प्रसिद्ध।
विषम चरण के अन्त मेंहोता जगण निषिद्ध।६।
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कठिन नहीं है मित्रवरदोहे का विन्यास।
इसको रचने के लिएकरो सतत् अभ्यास।७।।




5 टिप्‍पणियां:

  1. अनमोल सीख !!! कृपया ऐसे ही सिखाते रहें। आप जैसे छंद के नियमों के ज्ञाता और उन नियमों के पालक विरले ही मिलते हैं। हम शब्दों और भावनाओं का संयोजन करते हैं किंतु रस, भाव और छंदों के नियमों की अनदेखी कर जाते हैं.... लेखन का हाल ऐसा है जैसे मूर्तियाँ बहुतेरी बन रही हैं किंतु कलात्मकता, शिल्प और लावण्य का अभाव हो गया है । मैं स्वयं भी अपवाद नहीं हूँ किंतु सीखने के लिए हमेशा तैयार.... बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय आपका ऐसी रचनाओं को साझा करने के लिए!!! सादर प्रणाम ।

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  2. दोहे, सोरठे जैसे नाम आज की पीढ़ी के लिए तो अजूबा ही हैं !

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  3. दोहों में ही आपने दोहे की संरचना बता दी। बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं

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