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शुक्रवार, 22 जून 2018

दोहे "करना ऐसा प्यार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

ओस चाटने से कभी, नहीं मिटेगी प्यास।
तारों से होती नहीं, जग में कभी उजास।।

जीवन के संग्राम को, समझ न लेना खेल।
जीवनसाथी से सदा, रखना हरदम मेल।।

पूरे जीवन प्यार का, उतरे नहीं खुमार।
जीवनसाथी से सदा, करना ऐसा प्यार।।

प्रीत और मनुहार है, दुनिया का आधार।
जीवन साथी से सदा, करना सच्चा प्यार।।

बेमन से देना नहीं, वचन किसी को मित्र।
जिसमें तुम रँग भर सको, वही बनाना चित्र।।

1 टिप्पणी:

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