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बुधवार, 30 जनवरी 2019

दोहे "गाँधी का निर्वाण" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्य तिथि पर
अहिंसा के अस्तित्व पर कुछ दोहे-
 
अपना भारतवर्ष हैगाँधी जी का देश।
सत्य-अहिंसा के यहाँमिलते हैं सन्देश।।

चाहे काल भविष्य हो, वर्तमान या भूत।
सत्य-अहिंसा का किला, रहे सदा मजबूत।।

चाहे कोई खण्ड हो, या कोई हो काल।
जहाँ अहिंसा हो वहाँ, रहते अच्छे हाल।।

पूरब-पश्चिम, मध्य हो, या उत्तर-कशमीर।
सत्य-अहिंसा का सदा, बहता रहे समीर।।

सत्य-अहिंसा, प्रेम का, रहता जहाँ घनत्व।
कलम और तलवार का, होता अलग महत्व।।

देता सबको सीख है, गाँधी का निर्वाण।
हिंसा का परिवेश तो, ले लेता है प्राण।।

सत्य-अहिंसा से बना, भारत का गणतन्त्र।
पग-पग पर सद-भाव के, यहाँ गूँजते मन्त्र।।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 31.01.2019 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3233 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

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