"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शनिवार, 19 जनवरी 2019

अनुवाद "हरे पेड़ के नीचे BY WILLIAM SHAKESPEARE" (अनुवादक-डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

“Under the greenwood tree”
BY WILLIAM SHAKESPEARE
हरे पेड़ के नीचे
(अनुवादक-डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)
भावानुवाद
हरे पेड़ के नीचे
रहकर हरियाली में

मीठे सुर में गीत सुनाकर 
साथ परिन्दों के
कौन रहेगा 
मीत यहाँ पर
कौन बनेगा
बनकर बन प्यारा
वही रहेगा
मधुर-मधुर गायेगा
स्वर भरके 
जो गीत यहाँ पर

आओ खुश होकर
सब समझो सबको मीत यहाँ
सब ऋतुएँ अनुकूल बनें तब
कोई न होगा 
जग में जब विपरीत यहाँ

आओ-आओ खुश हो करके
सेंको धूप सुहानी
खुशी मिलेगी जब ही जग में
हो जायेगी तब आसानी

अगर तमन्नाएँ तज कर
जो मिल जाये खायें
मिट जायेगा बैर-भाव
जब मीत सभी बन जायें

आओ बनकर मीत खुशी से
सरदी के ऊबड़-खाबड़
मौसम को छोड़ो
सब ऋतुएँ अनुकूल बनेंगी
शत्रु नहीं है कोई यहाँ पर
व्यर्थ अहम् को मत ओढ़ो


2 टिप्‍पणियां:

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails