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गुरुवार, 31 जनवरी 2019

दोहे "जन्मभूमि में राम" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

 
मौजूदा माहौल में, किसको कहें महान।
आज देश में चल रहा, आतंकी फरमान।।

भ्रष्ट आचरण देश में, फैला चारों ओर।
सरकारी अनुभाग में, बैठे रिश्वतखोर।।

मुद्दा बनकर रह गया, आज राम का नाम।
अब भी रहते टेण्ट में, जन्मभूमि में राम।।

बना हुआ है देश में, हिंसा का परिवेश।
मात्र किताबों में बचे, ऋषियों के सन्देश।।

गाँधी पर भारी पड़ा, देखो नाथूराम।
दोनों का इतिहास में, अमर हो गया नाम।।

जर्रे-जर्रे मॆं नहीं, आज राम-रहमान।
अब तो पूजा-पाठ के, आलीशान मकान।।

धनवानों की कैद में, रहते हैं गुणवान।
निर्बल का बलराम है, आज राम का नाम।।

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