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शनिवार, 8 जून 2019

बालकविता "खट्टे-मीठे और रसीले" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गर्मी का मौसम है आया।
आड़ू और खुमानी लाया।।
 
आलूचा है या कहो बुखारा।
काला-काला कितना प्यारा।।
 
खट्टे-मीठे और रसीले।
काले-लाल और हैं पीले।।

सूरज जब शोले बरसाता।
धरती का पारा बढ़ जाता।।


तब ये अपना रूप दिखाते।
मैदानों की प्यास बुझाते।।

अगर चाहते हो सुख पाना।
मौसम के सारे फल खाना।।

3 टिप्‍पणियां:

  1. इतना बढ़िया लेख पोस्ट करने के लिए धन्यवाद! अच्छा काम करते रहें!। इस अद्भुत लेख के लिए धन्यवाद
    gana download kaise kare

    जवाब देंहटाएं
  2. Really awesome blog i seen in my life. Awesome layout and fully mobile responsive with best colorsChaluBaba

    जवाब देंहटाएं

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