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बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

बाल गीत "बच्चों अब मत समय गँवाओ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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मौसम कितना हुआ सुहाना।
रंग-बिरंगे सुमन सुहाते।
सरसों ने पहना पीताम्बर,
गेहूँ के बिरुए लहराते।।
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दिवस बढ़े हैं शीत घटा है,
नभ से कुहरा-धुंध छटा है,
पक्षी कलरव राग सुनाते।
गेहूँ के बिरुए लहराते।।
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काँधों पर काँवड़ें सजी हैं,
बम भोले की धूम मची है,
शिवशंकर को सभी रिझाते।
गेहूँ के बिरुए लहराते।।
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तन-मन में मस्ती छाई है,
अपनी बेरी गदराई है,
सभी झूमकर हँसते गाते।
गेहूँ के बिरुए लहराते।।
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निर्मल है नदियों का पानी,
पेड़ों पर छा गई जवानी,
खुश हो करके ये इठलाते।
गेहूँ के बिरुए लहराते।।
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बच्चों अब मत समय गँवाओ,
पढ़ने में भी ध्यान लगाओ,
सीख काम की हम सिखलाते।
गेहूँ के बिरुए लहराते।।
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प्रतिदिन पुस्तक को दुहराओ,
पास परीक्षा में हो जाओ,
श्रम से सभी सफलता पाते। 
गेहूँ के बिरुए लहराते।।
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6 टिप्‍पणियां:

  1. प्रतिदिन पुस्तक को दुहराओ,
    पास परीक्षा में हो जाओ,
    श्रम से सभी सफलता पाते।
    गेहूँ के बिरुए लहराते।।
    उत्तम सीख से सजा बहुत सुन्दर सृजन आदरणीय ।

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 20.02.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3617 में दिया जाएगा| आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|

    धन्यवाद

    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं
  3. आदरणीय शास्त्री जी बहुत ही सुंदर रचना

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर रचना आदरणीय सर।सादर प्रणाम। सुप्रभात।

    जवाब देंहटाएं

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