होगा जब नियमित नहीं, पुस्तक से सम्वाद। तब तक पुस्तक का दिवस, नहीं रहेगा याद।। -- जहाँ पुस्तकों से अधिक, बस्ते का हो भार। होगा बच्चों को भला, कैसे इनसे प्यार।। -- अभिरुचियाँ समझे बिना, रहे पौध को रोप। नन्हे मन पर शान से, देते कुण्ठा थोप।। -- बालक की रुचियाँ समझ, देते नहीं सुझाव। बेमतलब की पुस्तकें, भर देती उलझाव।। -- |
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शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021
दोहे "पुस्तक दिवस" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
गुरुवार, 22 अप्रैल 2021
ग़जल "शरीफों के घरानों की" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
काव्यसंकलन शामियाना-3 में मेरी ग़ज़ल माँग छोटे आशियानों की दरक़ती जा रही हैं नींव, अब पुख़्ता ठिकानों की तभी तो बढ़ गयी है माँग छोटे आशियानों की जिन्हें वो देखते कलतक, हिक़ारत की नज़र से थे उन्हीं के शीश पर छत, छा रहे हैं शामियानों की बहुत अभिमान था उनको, कबीलों की विरासत पर हुई हालत बहुत खस्ता, घमण्डी खानदानों की सियासत के समर में मिट गया, अभिमान दल-बल का अखाड़े में धुलाई हो गयी, जब पहलवानों की लगा झटका-बढ़ा खटका, खनककर आइना चटका बग़ावत कर रहीं अब पगड़ियाँ, दस्तारखानों की जगा है आम जब से, खास को होने लगी चिन्ता अचानक आ गयी है याद, मज़लूमों-किसानों की सलाखों का समाया डर, लगे अब काँपने थर-थर, उज़ाग़र ख़ामियाँ जब हो गयीं, इन बे-ईमानों की विदेशी बैंक में जाकर, छिपाया देश के धन को खुलेगी पोल-पट्टी अब, शरीफों के घरानों की सियासी गिरगिटों के “रूप” की, पहचान करने को निकल आयीं सड़क पर टोलियाँ, अब नौजवानों की |
बुधवार, 21 अप्रैल 2021
गीत "मन की बात नहीं कर पाया" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
नवदुर्गा "मैं देवी का हूँ उद्गाता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक')
नवदुर्गा तुमको सच्चे मन से ध्याता। दया करो हे दुर्गा माता।। व्रत-पूजन में दीप-धूप हैं, नवदुर्गा के नवम् रूप हैं, मैं देवी का हूँ उद् गाता। दया करो हे दुर्गा माता।। प्रथम दिवस पर शैलवासिनी, शैलपुत्री हैं दुख विनाशिनी, सन्तति का माता से नाता। दया करो हे दुर्गा माता।। देवी तुम हो मंगलकारिणी, निर्मल रूप आपका भाता। दया करो हे दुर्गा माता।। बनी चन्द्रघंटा तीजे दिन, मन्दिर में रहती हो पल-छिन, सुख-वैभव तुमसे है आता। दया करो हे दुर्गा माता।। कूष्माण्डा रूप तुम्हारा, भक्तों को लगता है प्यारा, पूजा से संकट मिट जाता। दया करो हे दुर्गा माता।। पंचम दिन में स्कन्दमाता, मोक्षद्वार खोलो जगमाता, भव-बन्धन को काटो माता। दया करो हे दुर्गा माता।। कात्यायनी बसी जन-जन में, आशा चक्र जगाओ मन में, भजन आपका मैं हूँ गाता। दया करो हे दुर्गा माता।। कालरात्रि की शक्ति असीमित, ध्यान लगाता तेरा नियमित, तव चरणों में शीश नवाता। दया करो हे दुर्गा माता।। महागौरी का है आराधन, कर देता सबका निर्मल मन, जयकारे को रोज लगाता। दया करो हे दुर्गा माता।। सिद्धिदात्री तुम कल्याणी सबको दो कल्याणी-वाणी। मैं बालक हूँ तुम हो माता। दया करो हे दुर्गा माता।। |
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