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सोमवार, 19 अप्रैल 2021

गीत "बूढ़ा पीपल जिन्दा है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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अभी गाँव के देवालय में, बूढ़ा पीपल जिन्दा है।
करतूतों को देख हमारी, होता वो शरमिन्दा है।।
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बाबू-अफसर-नेता करते, खुलेआम रिश्वतखोरी,
जिनका खाते माल, उन्हीं से करते हैं सीनाजोरी,
मक्कारी के जालों में, उलझा मासूम परिन्दा है।
करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।।

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माँ-बहनों की लज्जा लुटती, गलियों में-बाजारों में,
गुण्डागर्दी करने वाले, शामिल हैं सरकारों में,
लालन-पालन करने वाला, परेशान कारिन्दा है।
करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।।
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लोकतन्त्र में शासन करने के, सब ही अधिकारी हैं,
किन्तु अराजक तत्वों को, क्यों मिलती भागीदारी हैं,
मुक्त करो इनसे संसद को, कहता हर बाशिन्दा है।
करतूतों को देख हमारी, होता वो शरमिन्दा है।।

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ओछी गगरी सदा छलकती, भरी हुई चुपचाप रहे,
जिसकी दाढ़ी में तिनका है, वही ज्ञान की बात कहे,
आस्तीन का साँप हमेशा, करता चुगली-निन्दा है।
करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।।

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15 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय शास्त्री जी,आपकी सुंदर यथार्थपूर्ण रचना के लिए हार्दिक शुभकामनाएं एवम नमन ।

    जवाब देंहटाएं
  2. veerujan.blogspot.com
    लोकतन्त्र में शासन करने के, सब ही अधिकारी हैं,
    किन्तु अराजक तत्वों को, क्यों मिलती भागीदारी हैं,
    मुक्त करो इनसे संसद को, कहता हर बाशिन्दा है।
    करतूतों को देख हमारी, होता वो शरमिन्दा है।।
    --
    ओछी गगरी सदा छलकती, भरी हुई चुपचाप रहे,
    जिसकी दाढ़ी में तिनका है, वही ज्ञान की बात कहे,
    आस्तीन का साँप हमेशा, करता चुगली-निन्दा है।
    करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।.
    वाह शास्त्री जी राजनीतिक झरबेरियों को जन -मन के आहत मन को यूं गीतों में रख दिया यह कला कोई आपसे सीखे।

    जवाब देंहटाएं
  3. सच को दो टूक कह दिया है आपने शास्त्री जी।

    जवाब देंहटाएं
  4. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (19-4-21) को "श्वासें"(चर्चा अंक 4042) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  5. जय मां हाटेशवरी.......

    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    20/04/2021 मंगलवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में. .....
    सादर आमंत्रित है......


    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    https://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  6. वर्तमान समय की विडम्बनाओं पर करारा
    कटाक्ष करती
    कमाल की रचना

    सादर

    जवाब देंहटाएं
  7. आज के हालातों का खरा-खरा चित्रण !

    जवाब देंहटाएं
  8. समसामयिक रचना । यथार्थ को उकेर दिया है ।

    जवाब देंहटाएं
  9. संस्कारों के ह्रास को पीपल के पुराने पेड़ के माध्यम से सुंदरता से बताया आपने सार्थक सृजन आदरणीय।

    जवाब देंहटाएं
  10. आदरणीय शास्क्यात्री जी कहूँ आपके रचना कौशल के विषय में . जब भी पढ़ती हूँ अभिभूत होजाती हूँ . बहुत शानदार रचना .

    जवाब देंहटाएं
  11. आदरणीय सर, बहुत ही सुंदर और सशक्त दोहे देश में फैली आराजकता और दुराचार पर । सच में हमारी भारतीय संस्कृति और सभ्यता इससे शर्मिंदा होती रहती है और हमारे देश का ह्रास होता है। हृदय से आभार इस सुंदर रचना के लिए व आपको प्रणाम ।

    जवाब देंहटाएं
  12. आज के हालात को व्यक्त करती बेहतरीन रचना आदरणीय।

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत ही सुंदर सराहनीय सृजन सर।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  14. बूढ़े पीपल ने समाज को बदलते हुए देखा है. शायद उसे ही सबसे ज़्यादा समझ है कि हम ऐसे क्यूँ हो गए.अब सर पर पीपल की छांव भी नहीं. शास्त्रीजी, आपकी रचना ने दुखती रग को छू दिया. कोशिश रहेगी कि पीपल,नीम बरगद के पेड़ लगा सकूँ. याद दिलाने और एक सपना बोने के लिए आभार और प्रणाम.

    जवाब देंहटाएं
  15. खरी-खरी मत कह बेहतर कि तू हरदम चुपचाप रहे,
    सदियों पहले क्या कबीर पर गुज़री तुझको याद रहे !

    जवाब देंहटाएं

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