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सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

"इस आजादी से तो गुलामी ही अच्छी थी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

    आज के जमाने को देख-देखकर पुराने लोग बड़े हैरान हैं। वो अक्सर कहते हैं कि इस सुराज से तो अंग्रेजों का राज बहुत अच्छा था।
घटना आज से लगभग 80 वर्ष पुरानी होगी।
    मेरे पिता जी अक्सर इस घटना को सुनाते थे। नजीबाबाद से 5-6 किमी दूर श्रवणपुर के नाम से एक गाँव है। वहाँ मेरी बुआ जी रहतीं थी। उनके ससुर जी बड़े पराक्रमी थे। वो अपनी बिरादरी के जाने माने चैधरी थे।
   उन दिनों अंग्रेजोम का शासन था। एक अंग्रेज आफीसर बग्घी में सवार होकर गाँव के कच्चे रास्ते से सैर करने जा रहा था। मेरी बुआ जी के ससुर ने उनको कहा कि इस रास्ते में आगे कीचड़ है। इसलिए अपनी बग्गी को आगे मत ले जाओ। नही तो कीचड़ में फँस जायेगी। लेकिन अंग्रेज नही माना और आगे बढ़ गया।
    कुछ दूर पर कीचड़ में उसकी बग्घी फँस गयी। वो गाँव में आया और कुछ लोगो की मदद से अपनी बग्घी को कीचड़ में से निकलवा लाया।
    अब वो सीधे मेरी बुआ जी के ससुर के पास आया और उनको 25 रुपये (चाँदी के सिक्के) ईनाम स्वरूप भेंट किये। जिन्होंने उसकी बग्घी को कीचड़ से निकाला था उनको भी एक-एक रुपये का ईनाम दिया।
    बाद में पता लगा कि यह आफीसर जिले का डिप्टी कलेक्टर था।
   इसके बाद उस डिप्टी कलेक्टर ने सबसे पहला काम यह किया कि उस रोड को ऊँची करा कर उसमें खड़ंजा लगवाया।
पिता जी कहते थे कि आज के हुक्मरान तो विकास के नाम पर सिर्फ लीपा-पोती ही करते हैं। पिता जी ने मुझे वो खड़ंजा दिखाया था। जिसमें आज तक मरम्मत तक नहीं हुई थी।
   आज तो नेताओं से लेकर अधिकारियों तक के मुँह खून लगा है। हर काम में कमीशन व रिश्वतखोरी का बोल-बाला है। न्याय तक में भी रिश्वत का ही सिक्का चलता है। इसीलिए गरीब आदमी को न्याय नही मिल पाता है।
"इस आजादी से तो गुलामी ही अच्छी थी" 

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा लेख। गुलामी अच्छी तो नहीं कही जा सकती लेकिन यह जरूर कहना चाहिए की कानून में थोड़ी सख्ती जरूर होनी चाहिए।

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  2. सुन्दर सशक्त अभिव्यक्ति

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  3. और भी कई उदाहरण हैं जिनसे ये साबित होता है कि आज के रहनुमा या कर्णधार स्वार्थी और दिखावा करने वाले हैं.आपने दिल को छूने वाले दृष्टांत को लेखनीबद्ध किया, धन्यवाद है.

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  4. >> स्वतंत्रता का संग्राम इस हेतु छेड़ा गया था कि भारत में शासन तो अंग्रेजी ही हो, अंग्रेज 'हम' हों
    अभी भी अंग्रेज तो 'हम' ही हैं शेष सभी इस 'हम' के अनुयायी हैं ॥

    उत्तर देंहटाएं
  5. >> स्वतंत्रता का संग्राम इस हेतु छेड़ा गया था कि भारत में शासन तो अंग्रेजी ही हो, अंग्रेज 'हम' हों
    अभी भी अंग्रेज तो 'हम' ही हैं शेष सभी इस 'हम' के अनुयायी हैं ॥

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