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सोमवार, 9 फ़रवरी 2015

"दोहे-प्रस्ताव दिवस" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

प्रस्ताव-दिवस (PROMISE-DAY)
प्रेमदिवससप्ताह का, दिन है दूजा आज।
पश्चिम के अनुकरण का, बढ़ने लगा रिवाज।।
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कल गुलाब का दिवस था, आज दिवस प्रस्ताव।
एक साल में एक दिन, मन में उठता भाव।।
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किया जिसे गत वर्ष था, प्रस्तावित उपहार।
लेकिन क्यों इस साल में, बदला गया दिलदार।।
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पश्चिम के व्यवहार को, अपनाते हैं लोग।
भोगवाद में फँस गये, छोड़ दिया है योग।।
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राजनीति जैसा हुआ, आज प्रणय का खेल।
झूठे हैं प्रस्ताव सब, झूठा मन का मेल।।
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जीवनभर की प्रीत का, सिमट रहा आधार।
रासरंग के लिए ही, उमड़ रहा है प्यार।।
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ऋतुओं का राजा हमें, देता है सन्देश।
दिल से सच्चे मिलन का, उपजाओ परिवेश।।
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छोड़ो ढोंग-ढकोसले, तजो पश्चिमी रीत।
अमर हमेशा जो रहे, वो होती है प्रीत।।

4 टिप्‍पणियां:

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