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शनिवार, 7 मई 2016

गीत "माता से अस्तित्व हमारा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

ममता से जिसका है नाता।
वो ही कहलाती है माता।।

पाल-पोषकर हमें सँवारा,
माता से अस्तित्व हमारा,
सारा जग जिसके गुण गाता।
वो ही कहलाती है माता।।

जिसने भाषा को सिखलाया,
धरती पर चलना बतलाया,
जिसका रूप हमेशा भाता।
वो ही कहलाती है माता।।

भूखा शिशु जब था अकुलाया,
तब आँचल से दूध पिलाया,
जिसके सम्मुख सिर झुक जाता।
वो ही कहलाती है माता।।

दुनियादारी हमें सिखाती,
रिश्तों-नातों को समझाती,
जो दुनिया की जननी-जाता।
वो ही कहलाती है माता।।

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