"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

सोमवार, 15 जुलाई 2019

दोहे "गरिमा जीवन सार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गरिमा को मत त्यागिए, गरिमा जीवन सार।
जग में रहने के लिए, गरिमा है उपहार।।

रखना गरिमा को सदा, घर हो या ससुराल।
गरिमा जैसे तत्व को, रखना खूब सँभाल।।

गरिमा बतलाती हमें, साम-दाम के अर्थ।
गरिमा के बिन मनुज के, धर्म-कर्म हैं व्यर्थ।।

गरिमा सुख का सार है, गरिमा ही शृंगार।
गरिमा के कारण बने, मानव का आधार।।

गरिमा का जब तक हमें, मिलता रहता साथ।
तब तक रखते शीश पर, ईश्वर अपने हाथ।।

गरिमा के कारण मिले, चेलों को गुण-ज्ञान।
लेकिन गरिमाहीन को, मिलता है अपमान।।

गरिमा जैसे शब्द की, महिमा बड़ी महान।
गरिमा के बिन विज्ञ भी, कहलाते नादान।।

आभूषण है बदन का, यही स्वर्ण की खान।
गरिमा के हैं सामने, फीके सब सम्मान।।

3 टिप्‍पणियां:

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails