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गुरुवार, 15 अगस्त 2019

दोहे "राखी का उपहार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कितना अद्भुत है यहाँ, रिश्तों का संसार।
जीवन जीने के लिए, रिश्ते हैं आधार।१।
--
केवल भारत देश में, रिश्तों का सम्मान।
रक्षाबन्धन पर्व की, अलग अनोखी शान।२।
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कच्चे धागों से बँधी, रक्षा की पतवार।
रोली-अक्षत-तिलक में, छिपा हुआ है प्यार।३।
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भाई की लम्बी उमर, ईश्वर करो प्रदान।
बहनें भाई के लिए, माँग रहीं वरदान।४।
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सदा बहन की मदद को, भइया हों तैयार।
रक्षा का यह सूत्र है, राखी का उपहार।५।
--
चाहे युग बदलें भले, बदल जाय संसार।
अमर रहेगा हमेशा, यह पावन त्यौहार।६।
--
राखी के ही तार में, छिपी हुई है प्रीत।
जब तक चन्दा-सूर हैं, अमर रहेगी रीत।७।
--
राखी के दिन किसी का, सूना रहे न हाथ।
प्रेम-प्रीत की रीत का, छूटे कभी न साथ।८।
--
रेशम-जरी-कपास  के, रंग-बिरंगे तार।
ले करके बहना चली, अब बाबुल के द्वार।९।
--

2 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (17-08-2019) को " समाई हुई हैं इसी जिन्दगी में " (चर्चा अंक- 3430) पर भी होगी।

    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं

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