"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

गुरुवार, 22 अगस्त 2019

लघु कथा "माँ की ममता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

लघु कथा-माँ की ममता
     रम्भा देवी का एक ही बेटा है अर्जुन, जो मूम्बई में किसी कम्पनी में वाचमैन की नौकरी करता है। उसका परिवार उसके साथ ही रहता है। अर्जुन की माता जी पश्चिमी नेपाल के दैजी गाँव में अकेली रहती हैं। वह गठियावात से पीड़ित हैं। गाँव में उसकी एक बीघा जमीन है जो भारत के नौ बीघा के बराबर होती है। वह अक्सर मेरे अस्पताल में दवाई लेने आती है। वह गाँव के किसी अन्य व्यक्ति के साथ वो अपने बेटे से मिलने मुम्बई गयी थी। वहाँ से वो अपने बेटे का मोबाइल नम्बर भी लाई थी।
     अर्जुन अपनी माँ को कभी कोई पैसा भी नहीं भेजता था। इसलिए वह परेशान रहती थी। लेकिन अब उसके पास अर्जुन का फोन नम्बर था और वो अक्सर मेरे मोबाइल से अपने बेटे का फोन मिलवा लेती थी। रो-रोकर वह अपने पोते-पोती, बहू-बेटे से बात करती थी। अपने परिजनों को याद करके उसकी आँखों में आँसू आ जाते थे।
     वह बात-चीत में फोन पर कहती थी कि बेटा तुम्हारी बहुत याद आती है। मगर बेटा अपने काम में मस्त रहता था और माँ की कोई चिन्ता नहीं करता था। यह माँ का दिल ही है कि बेटा कितना भी निष्ठुर क्यों न हो जाये मगर माँ कभी निष्ठुर नहीं हो सकती।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails