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रविवार, 25 अगस्त 2019

दोहे "पण्डित टीकाराम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!
आज मेरे मित्र कविमना स्व. टीकाराम पाण्डेय जी की
6वीं पुण्यतिथि पर उनके पुत्र रवीन्द्र पाण्डेय पपीहा ने
बनबसा चम्पावत में एक कविगोष्ठी का आयोजन किया।
इस अवसर पर श्रद्धांजलिस्वरूप मेरे कुछ दोहे-
 
पण्डित टीकाराम थे, जिन्दादिल इंसान।
सदा सींचते वो रहे, कविता का उद्यान।।
 --
कैसे भी हालात हों, कभी न मानी हार।
मीठी वाणी से दिया, लोगों को उपहार।।
-- 
स्वरलहरी थी मोहिनी, अद्भुत शब्द विधान।
उद्घोषक के रूप में, जिनकी थी पहचान।।
-- 
काव्यकला में निपुण थे, पण्डित टीका राम।
अनुशासित होकर किये, अपने सारे काम।।
-- 
करते श्रद्धाभाव से, हम जिनको हैं याद।
सैनिक सा जीवन जिया, सेवा के भी बाद।।
-- 
गूँज रहे हैं व्योम में, उनके शुभ सन्देश।
जाति-धर्म से है बड़ा, अपना भारत देश।।
-- 
चलता उनकी राह पर, उनका है परिवार।
धूप-दीप श्रद्धासुमन, करो मित्र स्वीकार।।
--

1 टिप्पणी:

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