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बुधवार, 14 अगस्त 2019

गीत "वीरों के बलिदान से" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')



लहर-लहर लहराता झण्डा, यहाँ बड़े अभिमान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।

पराधीन अपना भारत था, अँगरेजों का शासन था,
दुष्ट-बणिक मक्कार-फिरंगी का, सब ओर कुशासन था,
स्वतन्त्रता की भोर हुई थी, वीरों के बलिदान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।

क्रान्तिकारियों ने अँगरेजी शासन में बिगुल बजाया था,
अँगरेजो भारत छोड़ो का, नारा यहाँ लगाया था,
भारतमाता की सरहद हैं, रक्षित वीर जवान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।

करते हैं जीतोड़ परिश्रम, कृषक अन्न उपजाते हैं,
जीवन में हम उनके बल पर, ही आनन्द मनाते हैं.
हरी-भरी अपनी धरती है, जग में श्रमिक-किसान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।

प्रजातन्त्र परिवेश हमारा, सारे जग से है न्यारा,
तीन रंग का अपना झण्डा, हमको प्राणों से प्यारा,
न्याय-व्यवस्था होती लागू, सब पर एक विधान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।

हम है वीर सपूत धरा के, सत्य-अहिंसा के पोषक,
शान्ति हमारा मूलमन्त्र है, हम हैं इसके उद्घोषक,
आजादी अक्षुण्ण हमारी, देवों के वरदान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।

धरा-गगन में आज हमारी, गूँज सुनाई देती है,
नित्य नये अन्वेषण की, अब झलक दिखाई देती है
ज्ञान और विज्ञान बँधा है, अपने विमल-वितान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।

संविधान लागू भारत का, अब अपने कशमीर में,
देशभक्ति की खुशबू फैली, बहते हुए समीर में,
वन्दे-भारत गूँज रहा है, शैलशिखर-मैदान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।
--

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 15.8.2019 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3428 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

    दिलबागसिंह विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 15 अगस्त 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर देशभक्ति गीत है सर।सादर।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दर गीत है सर |
    प्रणाम
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  5. 'मयंक' जी, आपकी देशभक्तिपूर्ण कविता पाठकों में मन में उत्साह, त्याग-बलिदान की भावना और वीर-रस का संचार करने में सक्षम है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन स्वतंत्रता और रक्षा की पावनता के संयोग में छिपा है सन्देश : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत शानदार प्रस्तुति आदरणीय।

    उत्तर देंहटाएं

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