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बुधवार, 10 फ़रवरी 2016

दोहे "प्रेमदिवस नज़दीक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दिन ज्यों-ज्यों बढ़ने लगा, चढ़ने लगा खुमार।
मौसम सबको बाँटता, वासन्ती उपहार।१।

चहक उठी है वाटिकामहक उठा है रूप।
भँवरे गुंजन कर रहेखिली-खिली है धूप।२।

जैसे-जैसे आ रहाप्रेमदिवस नज़दीक।
वैसे-वैसे हो रहामौसम भी रमणीक।३।

जोड़ों पर चढ़ने लगाप्रेमदिवस का रंग।
रीत पुरानी है वहीमगर नये हैं ढंग।४।

कर्कश सुर में गा रहेभौंडे-भौंडे गीत।।
नये साज के शोर मेंबदल गया संगीत।५।

बरस रहा शृंगार हैसरस रहा मधुमास।
जड़-चेतन को हो रहामस्ती का आभास।६।

काँवड़ लेने चल पड़े, शंकर जी के भक्त।
शिव आराधन में हुआ, मन सबका अनुरक्त।७।

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