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सोमवार, 15 फ़रवरी 2016

दोहे "खिलता हुआ बसन्त) (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

खूब चला सप्ताहभर, प्रेम-दिवस संयोग।
आज खत्म हो जायेगा, मधुर-मिलन का रोग।१।
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वैलेण्टाइन-दिवस पर, निभा रहे सब रीत।
आलिंगन-चुम्बन नहीं, कहलाती है प्रीत।२।
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क्यों सूली पर चढ़ गया, वैलेण्टाइन सन्त।
इसका उत्तर माँगता, खिलता हुआ बसन्त।३।
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पश्चिम की है सभ्यताप्रेमदिवस का वार।
लेकिन अपने देश मेंप्रतिदिन प्रेम अपार।४।
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आडम्बर से युक्त हैप्रेमदिवस का खेल।
आज वासनामय हुआसुमनों का ये मेल।५।
--
प्रेम दिवस पर लीजिएव्रत जीवन में धार।
पल-पल,हर पल कीजिएसच्चा-सच्चा प्यार।‍‍‍६।
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मन-विचार मिल जाय जबसमझो तभी बसन्त।
पल-प्रतिपल मधुमास हैसमझो आदि न अन्त।७।
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सुख सरिता बहती रहेधार न हो अवरुद्ध।
निशि-दिन प्रेम प्रवाह सेइसको करो समृद्ध।८।
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चहक रहे हैं बाग मेंकलियाँ-सुमन अनेक।
धीरज और विवेक सेचुनना केवल एक।९।
--
दिल से मत तजना कभीप्रीत-रीत उदगार।
सारस से लो सीख तुमक्या होता है प्यार।१०।
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चिकनी-चुपड़ी देखकर,मत टपकाओ लार।
सोच-समझकर ही सदादेना कुछ उपहार।११।
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पत्नीपुत्रीबहन कामात-पिता का प्यार।
उनको ही मिलता सदाजिनका हृदय उदार।१२।
--
नादानी में मत कभीकरना अन्धा प्यार।
भली-भाँति सब सोचकरही करना इकरार।१३।
--
जीवनभर ना मिट सकेबरसाओ वह रंग।
सिखलाओ संसार कोप्रेम-प्रीत का ढंग।१४।

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