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गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016

दोहे "प्रतिज्ञा दिवस" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

11 फरवरी
प्रॉमिज-डे (प्रतिज्ञा दिवस)
प्रण करने का बन रहा, आज सुखद संयोग।
सदा प्रतिज्ञा में बँधो, होगा नहीं वियोग।।
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सोच-समझ कर बोलिए, वाणी है अनमोल।
अपने वचनों को सदा, तोल-तोल कर बोल।।
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हाड़-मांस की जीभ को, कभी न देना छूट।
रसना ही तो डालती, सम्बन्धों में फूट।।
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प्रतिज्ञा के पर्व परदेना मत सन्ताप।
चमक-दमक की भीड़ मेंबिछड़ न जाना आप।।
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बेमन से देना नहींवचन किसी को मित्र।
जिसमें तुम रँग भर सकोवही बनाना चित्र।।

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