"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

रविवार, 21 फ़रवरी 2016

दोहे "काग़ज़ की नाव" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मंजिल पाने के लिए, करता जोड़-घटाव।
लहरों के आगोश में, कागज की है नाव।।
--
बारिश के जल का हुआ, गड्ढों में ठहराव।
बनी खेलने के लिए, कागज की है नाव।।
--
बेर-केर का कभी भी, मिलता नहीं सुभाव।
रद्दी काग़ज़ से बनी, कागज की है नाव।।
--
बच्चों के मस्तिष्क में, भरना नहीं तनाव।
पार नहीं जाती कभी, कागज की है नाव।।
--
गैरों के जैसा कभी, करना मत बर्ताव।
अनुबन्धों से है बँधी, कागज की है नाव।।
--
जाने कितने तरह के, मन में आते भाव।
चलती बिन पतवार के, कागज की है नाव।।
--
जाती है उस ओर ही, होता जिधर बहाव।
मन बहलाने के लिए, कागज की है नाव।। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

समर्थक

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails