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बुधवार, 20 जुलाई 2016

दोहे "खिलता सुमन गुलाब" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


आसन काँटों का मिला, ऐसा फूल गुलाब।
जिसको पाने के लिए, दुनिया है बेताब।।
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जिस उपवन में है नहीं, खिलता सुमन गुलाब।
वहाँ नहीं आता कभी, रसिकों का सैलाब।।
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खुशबू और गुलाब का, आपस में सम्बन्ध।
भीनी-भीनी बाँटता, सबको मधुर सुगन्ध।।
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देता फूल गुलाब का, लोगों को सन्देश।
संरक्षण देता सदा, काँटों का परिवेश।।
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सुख-दुख दोनों में रखो, मन को एक समान।
हरदम रहनी चाहिए, चेहरे पर मुसकान।।
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जीवन जियो गुलाब सा, बाँटों सबको गन्ध।
रिश्तों-नातों में नहीं, चलता है अनुबन्ध।।
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देश-वेश-परिवेश से, करो हमेशा प्यार।
कदम-कदम पर दे रही, धरा हमें उपहार।।

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