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शनिवार, 23 जुलाई 2016

दोहे "वर्षा का आनन्द" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सावन आया झूम के, पड़ती सुखद फुहार।
तन-मन को शीतल करे, बहती हुई बयार।१।
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सावन अपने साथ में, लाता है त्यौहार।
रक्षाबन्धन-तीज के, संग बहन का प्यार।२।
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श्रावण शुक्ला पंचमी, बहुत खास त्यौहार।
नाग पंचमी आज भी, श्रद्धा का आधार।३।
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जंगल में मंगल हुआ, सुधरा है परिवेश।
सावन हमको दे रहा, जीवन का सन्देश।४।
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शैल शिखर से आ रही, नभ में सघन कतार।
 कहीं बरसता रात-दिन, कहीं गरज-बौछार।५।
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बालक बैठे ले रहे, वर्षा का आनन्द।
भीनी-भीनी आ रही, पौधों में से गन्ध।६।
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मक्का फूली खेत में, पके डाल पर आम।
जामुन गदराने लगी, डाली पर अभिराम।७।
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चारों ओर बिछा हुआ, हरा-हरा कालीन।
पौधों को जीवन मिला, खुश हैं जल में मीन।८।
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बया चहकती नीड़ में, चिड़िया मौज मनाय।
पौध धान की शान से, लहर-लहर लहराय।९।
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काँवड़ लेने चल पड़े, भक्त शम्भु के द्वार।
बम-भोले के नाम की, होती जय-जयकार।१०।
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मानसरोवर जा रहे, जत्थों में कुछ लोग।
शिवजी को कैलाश में, चले लगाने भोग।११। 

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