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गुरुवार, 11 मई 2017

बालकविता "खरबूजे का मौसम आया" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों...!
गर्मी अपने पूरे यौवन पर है।
ऐसे में मेरी यह बालरचना 
आपको जरूर सुकून देगी!
पिकनिक करने का मन आया!
मोटर में सबको बैठाया!!
family_car_250
पहुँच गये जब नदी किनारे!
खरबूजे के खेत निहारे!!
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ककड़ीखीरा और तरबूजे!
कच्चे-पक्के थे खरबूजे!!
prachi&pranjal
प्राचीकिट्टू और प्रांजल!
करते थे जंगल में मंगल!!
rcmelon
लो मैं पेटी में भर लाया!
खरबूजे का मौसम आया!!
picknic
देख पेड़ की शीतल छाया!
हमने आसन वहाँ बिछाया!!
जम करके खरबूजे खाये!
शाम हुई घर वापिस आये!!

1 टिप्पणी:

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