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गुरुवार, 11 अप्रैल 2019

दोहे "जगह-जगह मतदान" डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’


प्रथम चरण में हो रहा, जगह-जगह मतदान।
लगा रहे हैं जीत का, प्रत्याशी अनुमान।।

पाँच साल में देश में, होते आम चुनाव।
जनता के मतदान से, पार लगेगी नाव।।

मजबूती से थामता, जो अपनी पतवार।
उसकी ही जनतन्त्र में, बनती है सरकार।।

जनता के हित में किये, जिसने काम तमाम।
शासन करने का उसे, मिल जाता है काम।।

असमंजस में हैं यहाँ, दल-बल के सरदार।
कौन बनेगा देश का, फिर से चौकीदार।।

कौन साधु अब तक रहा, चोर रहा है कौन।
कुछ दिन में नेपत्थ्य से, मिट जायेगा मौन।।

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