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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019

दोहे "बलशाली-हनुमान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ' मयंक')

हनुमान जयन्ती की
सभी भक्तों और पाठकों को 
बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।
धीर-वीर, रक्षक प्रबल, बलशाली-हनुमान।
जिनके हृदय-अलिन्द में, रचे-बसे श्रीराम।।
--
महासिन्धु को लाँघकर, नष्ट किये वन-बाग।
असुरों को आहत किया, लंका मे दी आग।।
--
कभी न टाला राम का, जिसने था आदेश।
सीता माता को दिया, रघुवर का सन्देश।।
--
लछिमन को शक्ति लगी, शोकाकुल थे राम।
पवन वेग की चाल से, पहुँचे पर्वत धाम।।
--
संजीवन के शैल को, उठा लिया तत्काल।
बूटी खा जीवित हुए, दशरथ जी के लाल।।
--
बिगड़े काम बनाइए, बनकर कृपा निधान।
कोटि-कोटि वन्दन तुम्हें, पवनपुत्र हनुमान।। 

4 टिप्‍पणियां:


  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (20-04-2019) को "रिश्तों की चाय" (चर्चा अंक-3311) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    - अनीता सैनी

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर... हार्दिक शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  3. भक्तिपूर्ण रचना. हनुमान जयंती की शुभकामनाएँ

    उत्तर देंहटाएं
  4. उत्कृष्ट भक्ति भाव से भरे सुंदर दोहे।

    उत्तर देंहटाएं

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