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लोगों
में सम्मान की, लगी हुई है होड़।
करते
लोग खुशामदें, लिखना-पढ़ना छोड़।।
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प्रतिभाओं
का हो रहा, दुनिया में अपमान।
क्रय करते कुछ लोग हैं, अब झूठे सम्मान।।
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सम्मानों
की दौड़ से, रखना खुद को दूर।
लिख करके
साहित्य को, मत होना मगरूर।।
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काम
कलम का बोलता, नहीं बोलता नाम।
छोड़
मान-व्यामोह को, करते रहना काम।।
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मंचों
पर आसीन हैं, अब झूठे आरोह।
सम्मानों
की दौड़ में, पागल हुए गिरोह।।
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ओत-प्रोत
हों छन्द से, गजल, दोहरे-गीत।
छन्दमुक्त
होता नहीं, कोई भी संगीत।।
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दिल पर
करते असर हैं, दिल से निकले भाव।
सम्मानों
के आसरे, पार न होगी नाव।।
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गद्य-पद्य
के साथ में, लिखो कथानक-कथ्य।
कालजयी
वो काव्य है, जिसमें होता तथ्य।।
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वाह ! अति सुन्दर
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
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