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भावों-शब्दों में जहाँ, तारतम्य हो जाय।
भाषा में साहित्य की, वो कविता कहलाय।।
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किसी तिजोरी में नहीं, होता सम्यक कोष।
होते सबके काव्य में, भरे हुए कुछ दोष।।
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प्रतिदिन करना सृजन को, रच देना इतिहास।
मत लिखना साहित्य वो, जिससे हो उपहास।।
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चरैवेति के मन्त्र को, भूल न जाना मित्र।
लेखक की ही लेखनी, जाहिर करे चरित्र।।
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नश्वर होती देह है, अमर रहे साहित्य।
आदिकाल से जगत में, जीवित है आदित्य।।
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कायर को इस धरा पर, कहते नहीं नवाब।
धीर-वीर ही समय पर, देता सही जवाब।।
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छीछालेदर मत करो, करके ओछी बात।
सोच-समझकर बोलिए, रखकर सम अनुपात।।
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बहुत शानदार दोहे।
जवाब देंहटाएंअच्छी सीख
जवाब देंहटाएंShaandar dohe. Ameblo, Twitter & Nihan blog
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